इलेक्शन की जिसकी सबसे बड़ी मान्यता है, हम और आप सोचते हैं कि वो निष्पक्ष है। निष्पक्ष इंस्टीट्यूशन से ये उम्मीद करते हैं कि डेमोक्रेसी को और स्ट्रांग करेंगे, डेमोक्रेसी को और मजबूत करेंगे। लेकिन जब वहीं पर इस तरह का व्यवहार हो रहा हो कि 14 बार 10 महीने में कई उसके जो अधिकारी थे, उन्होंने अपना नोट लिखा है तो आप कल्पना कर सकते हैं इलेक्शन कमीशन किसके बिहाफ पे इस तरह का व्यवहार कर रहे थे। ये हमारे लोकतंत्र के लिए घातक है। ये हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है। जो निष्पक्ष इंस्टीट्यूशन है, वो भी निष्पक्ष नहीं बची। और आपको याद होगा, जिस समय समाजवादी पार्टी 2022 में चुनाव हारी थी, मैंने ये आरोप लगाया था कि इलेक्शन कमीशन के अधिकारियों ने जानबूझकर के समाजवादी पार्टी के वोटों को चिन्हित करके वोटर लिस्ट से निकाला गया था, डिलीट किया गया था। और जब उन्होंने नोटिस दिया समाजवादी पार्टी को तो हम लोगों ने बड़ी संख्या में एफिडेविट के साथ इलेक्शन कमीशन को वो जानकारी दी लेकिन एक भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
चुनाव आयोग द्वारा कोई फैसले हुए हो उन पर आपत्ति दर्ज कराई है
ब्रेकिंग न्यूज: बुद्धवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का निशाना निष्पक्षता पर सवाल।
On: September 23, 2026 10:51 AM
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